भगवद् गीता वर्ल्ड

मुख में ब्रह्मांड दर्शन

मिट्टी खाने की शिकायत पर जब माता यशोदा ने कान्हा का मुख खुलवाया, तो उन्हें उसमें पूरा ब्रह्मांड दिखाई दिया।

एक दिन बलराम जी और ग्वाल-बाल खेलते-खेलते दौड़कर माता यशोदा के पास आए और बोले, मैया, कान्हा ने मिट्टी खाई है। माता को चिंता हुई कि कहीं लाला का पेट न बिगड़ जाए। उन्होंने कान्हा का हाथ पकड़ा और डाँटते हुए पूछा, अरे नटखट, तूने चुपके से मिट्टी क्यों खाई? देख, तेरे दाऊ भैया और सब सखा यही कह रहे हैं।

डरे हुए से कान्हा ने भोलेपन से कहा, मैया, मैंने मिट्टी नहीं खाई। ये सब झूठ बोल रहे हैं। यदि तुम्हें इनकी बात सच लगती है, तो स्वयं मेरा मुँह देख लो। यह कहकर बालकृष्ण ने अपना छोटा-सा मुख खोल दिया।

माता यशोदा ने जैसे ही मुख में झाँका, वे स्तब्ध रह गईं। उस नन्हे मुख में उन्हें सारा ब्रह्मांड दिखाई दिया। आकाश, दिशाएँ, पर्वत, द्वीप, समुद्र, पृथ्वी, बहती वायु, अग्नि, चंद्रमा और तारे, सब उसमें थे। उन्होंने उसमें पंचमहाभूत, इंद्रियाँ, मन और प्रकृति के तीनों गुण देखे, और काल तथा जीवों के कर्मों की विचित्रता भी देखी। सबसे आश्चर्य की बात यह थी कि उसी मुख में उन्हें व्रज भी दिखा और स्वयं अपने आपको भी।

माता का हृदय काँप उठा। वे सोचने लगीं कि यह स्वप्न है, कोई देवमाया है, या मेरे इस बालक की ही कोई अद्भुत शक्ति है। फिर उन्होंने उस परमेश्वर की शरण ली, जिसकी माया से यह संसार चलता है और जिसके कारण वे स्वयं को नंद की पत्नी और इस बालक की माँ समझती हैं।

जब माता ने भगवान के वास्तविक स्वरूप को जान लिया, तब प्रभु ने उन पर फिर से अपनी वैष्णवी माया का, अर्थात वात्सल्य प्रेम का पर्दा डाल दिया। माता यशोदा क्षण भर में सब भूल गईं और लाला को गोद में उठाकर पहले की तरह दुलारने लगीं। भगवान अपने भक्तों के प्रेम को उनकी महिमा के ज्ञान से भी अधिक मूल्यवान मानते हैं।

Source
Shrimad Bhagavatam, Canto 10, ch. 8
Place
Gokul
Lesson
भगवान की महिमा अनंत है, पर वे अपने भक्तों के साथ प्रेम के मधुर संबंध को ही सबसे अधिक संजोते हैं।

इसी श्रेणी में और – कृष्ण लीला