भगवद् गीता वर्ल्ड

श्रीकृष्णः शरणं मम

पुष्टिमार्ग का अष्टाक्षर मंत्र — "श्रीकृष्ण ही मेरी शरण हैं।" गुजरात और व्रज के वैष्णवों में अत्यंत प्रिय।

श्रीकृष्णः शरणं मम

śrīkṛṣṇaḥ śaraṇaṃ mama

अर्थ: "श्रीकृष्ण ही मेरी शरण (आश्रय) हैं।" यह आठ अक्षरों का मंत्र पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त करता है — जो गीता अध्याय 18, श्लोक 66 के "मामेकं शरणं व्रज" का ही सार है।

श्री वल्लभाचार्य जी द्वारा स्थापित पुष्टिमार्ग में यही "अष्टाक्षर मंत्र" है। नाथद्वारा, गोकुल और गुजरात की हवेलियों से जुड़े वैष्णव परिवारों में इसे सुबह उठते ही, भोजन से पहले और हर शुभ कार्य के आरंभ में बोलने की परंपरा है।

इसे कोई भी प्रेम से स्मरण कर सकता है। पुष्टिमार्गीय दीक्षा की विधि अपने संप्रदाय के गुरु या हवेली से जानना उचित है।

Syllables
8
Source
Pushtimarg tradition of Shri Vallabhacharya

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