श्रीकृष्ण गायत्री मंत्र
गायत्री छंद में श्रीकृष्ण की प्रार्थना — देवकीनंदन वासुदेव हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि ।
तन्नः कृष्णः प्रचोदयात् ॥
oṃ devakīnandanāya vidmahe vāsudevāya dhīmahi tannaḥ kṛṣṇaḥ pracodayāt
अर्थ: हम देवकी के पुत्र को जानें, वासुदेव का ध्यान करें; वे श्रीकृष्ण हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
मूल गायत्री मंत्र की तरह ही इस मंत्र में भी जानने, ध्यान करने और प्रेरणा माँगने — तीनों भाव हैं। इसे विशेष रूप से विद्यार्थी और गीता का अध्ययन करने वाले लोग पढ़ाई से पहले बोलते हैं।
इसे प्रातः या संध्या के समय दीपक जलाकर 11 या 108 बार शांत मन से बोलें। कई पुस्तकों में "तन्नो कृष्णः" पाठ भी मिलता है; दोनों का भाव एक ही है।
- Source
- Traditional
- Japa Count
- 108