कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
श्रीमद्भागवत का प्रसिद्ध प्रार्थना-श्लोक — शरणागत के क्लेश नष्ट करने वाले गोविंद को बार-बार नमस्कार।
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।
प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ॥
kṛṣṇāya vāsudevāya haraye paramātmane praṇata-kleśa-nāśāya govindāya namo namaḥ
अर्थ: श्रीकृष्ण, वासुदेव, हरि और परमात्मा को, जो शरण में आए हुए लोगों के क्लेश नष्ट कर देते हैं, उन गोविंद को बार-बार नमस्कार है।
श्रीमद्भागवत (दशम स्कंध) के अनुसार यह प्रार्थना उन राजाओं ने की थी जिन्हें श्रीकृष्ण ने जरासंध के कारागार से मुक्त कराया था। इसलिए यह श्लोक कठिन समय में भगवान से सहायता माँगने की सबसे प्रिय प्रार्थनाओं में से है।
इसे पूजा के अंत में, सोने से पहले, या किसी चिंता के समय श्रद्धा से 3, 11 या 108 बार बोला जा सकता है।
- Source
- Shrimad Bhagavatam, Canto 10 (prayer of the kings released from Jarasandha, 10.73.16)