भगवद् गीता वर्ल्ड

गोपाल मंत्र (अष्टादशाक्षर)

गोपाल-तापनी उपनिषद् में वर्णित श्रीकृष्ण का अठारह अक्षरों का मंत्र, जो गोपीजन-वल्लभ गोविंद को समर्पित है।

क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा

klīṃ kṛṣṇāya govindāya gopījanavallabhāya svāhā

अर्थ: "क्लीं" बीज के साथ — श्रीकृष्ण को, गोविंद को, गोपीजनों के प्रिय को यह आहुति (समर्पण) है।

यह मंत्र गोपाल-तापनी उपनिषद् और अनेक वैष्णव परंपराओं में श्रीकृष्ण के प्रमुख मंत्र के रूप में प्रसिद्ध है। इसमें "क्लीं" बीजाक्षर है, इसलिए परंपरा के अनुसार ऐसे बीज-मंत्र का जप गुरु से दीक्षा लेकर, उनके बताए नियमों के साथ करना उचित माना जाता है।

जिन्होंने दीक्षा नहीं ली है, वे इसके भाव का ध्यान कर सकते हैं और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या हरे कृष्ण महामंत्र जैसे सर्वसुलभ मंत्रों का जप कर सकते हैं।

Syllables
18
Source
Gopala Tapani Upanishad

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