श्री राधा कौन हैं?
श्री राधा बरसाना के राजा वृषभानु की पुत्री और श्रीकृष्ण की परम प्रिया हैं, जिन्हें भक्ति परंपरा में शुद्ध प्रेम और भक्ति का सर्वोच्च रूप माना जाता है।
उत्तर
श्री राधा व्रज के बरसाना में राजा वृषभानु और माता कीर्ति की पुत्री हैं। उनका प्राकट्य भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को माना जाता है, जिसे राधाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। वे श्रीकृष्ण की परम प्रिया और गोपियों में सर्वश्रेष्ठ हैं।
भक्ति परंपरा में राधारानी को केवल एक प्रेमिका नहीं, बल्कि भगवान की आह्लादिनी शक्ति, अर्थात आनंद देने वाली दिव्य शक्ति माना जाता है। इसीलिए "राधे-कृष्ण" या "राधे-श्याम" के रूप में उनका नाम श्रीकृष्ण से पहले लिया जाता है। उनका प्रेम पूर्णतः निःस्वार्थ है और भक्त उन्हें भक्ति का आदर्श मानते हैं।
एक बात उल्लेखनीय है: श्रीमद्भागवत में राधाजी का नाम स्पष्ट रूप से नहीं आता, यद्यपि आचार्य रासलीला की एक विशेष गोपी में उनका संकेत देखते हैं। उनका विस्तृत वर्णन पद्म पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, जयदेव के गीतगोविंद और बाद के भक्त कवियों की रचनाओं में मिलता है। निंबार्क, गौड़ीय, वल्लभ और राधावल्लभ जैसी परंपराओं में उनकी विशेष उपासना होती है।