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जन्माष्टमी का व्रत कैसे रखें?

सामान्यतः भक्त दिनभर उपवास या फलाहार करते हैं और मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्म की पूजा के बाद व्रत खोलते हैं; परिवार और संप्रदाय के अनुसार रीतियाँ अलग होती हैं।

उत्तर

जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मनाई जाती है। व्रत की रीतियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं, इसलिए अपनी कुल-परंपरा या गुरु के निर्देश को प्राथमिकता दें। एक सामान्य प्रचलित विधि इस प्रकार है।

सुबह स्नान करके भगवान के सामने व्रत का संकल्प लें। दिनभर अन्न न लें; कुछ भक्त निर्जल व्रत रखते हैं, जबकि अधिकतर फल, दूध और व्रत के उपयुक्त पदार्थ लेते हैं। दिन में भजन, कीर्तन, नाम-जप और श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध से जन्म-कथा का पाठ करें।

मध्यरात्रि को श्रीकृष्ण जन्म के समय लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें, नए वस्त्र और शृंगार अर्पित करें, झूला झुलाएँ, आरती करें और माखन-मिश्री, पंजीरी आदि का भोग लगाएँ। इसके बाद प्रसाद से व्रत खोलें; कुछ परिवारों में व्रत अगले दिन सुबह खोला जाता है।

बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और अस्वस्थ लोग अपनी क्षमता के अनुसार हल्का व्रत रखें। भगवान को भाव प्रिय है, कठोरता नहीं।

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