भगवद् गीता वर्ल्ड

श्रीकृष्ण ने पृथ्वी लोक कैसे छोड़ा?

प्रभास क्षेत्र में यदुवंश के अंत के बाद, एक पीपल वृक्ष के नीचे बैठे श्रीकृष्ण के चरण में जरा नामक व्याध का बाण लगा और वे स्वधाम पधारे; यह स्थान भालका तीर्थ कहलाता है।

उत्तर

महाभारत के मौसल पर्व और श्रीमद्भागवत के एकादश स्कंध में श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन का वर्णन है। ऋषियों के शाप और, महाभारत के अनुसार, माता गांधारी के शाप के फलस्वरूप यदुवंश का अंत निकट आया। प्रभास क्षेत्र में यादव आपस में लड़कर नष्ट हो गए। बलरामजी ने समुद्र तट पर योग द्वारा देह त्याग दी।

इसके बाद श्रीकृष्ण एक पीपल के वृक्ष के नीचे शांत भाव से बैठ गए। जरा नामक एक व्याध ने दूर से उनके लाल चरण को हिरण का मुख समझकर बाण चला दिया। पास आकर अपनी भूल समझने पर वह बहुत दुखी हुआ, पर भगवान ने उसे सांत्वना दी और कहा कि यह सब उनकी इच्छा से हुआ है। एक लोकप्रिय परंपरा के अनुसार जरा पूर्वजन्म में वाली था। इसके बाद भगवान अपने धाम पधारे।

यह स्थान आज गुजरात में सोमनाथ के निकट, वेरावल में "भालका तीर्थ" के नाम से प्रसिद्ध है। पास ही हिरण नदी के तट पर त्रिवेणी संगम के निकट "देहोत्सर्ग" तीर्थ है। परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन के साथ ही कलियुग का आरंभ हुआ।

Source
Mahabharata, Mausala Parva; Shrimad Bhagavatam, Canto 11
Place
Bhalka Tirth, Prabhas Patan (Somnath), Gujarat

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