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श्रीमद् भगवद् गीता अध्याय 1, श्लोक 16

अध्याय 1 – अर्जुनविषादयोग · वक्ता: संजय

संस्कृत श्लोक

अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ।
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ॥

उच्चारण (रोमन लिप्यंतरण)

anantavijayaṃ rājā kuntīputro yudhiṣṭhiraḥ .
nakulaḥ sahadevaśca sughoṣamaṇipuṣpakau ॥

अर्थ

कुन्ती-पुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनन्तविजय नामक शंख बजाया, तथा नकुल और सहदेव ने क्रमशः सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाए

शब्दार्थ

  • अनन्तविजयम् – अनन्तविजय नामक शंख
  • राजा – राजा
  • कुन्तीपुत्रः – कुन्ती के पुत्र
  • युधिष्ठिरः – युधिष्ठिर
  • नकुलः – नकुल
  • सहदेवः – सहदेव
  • च – और
  • सुघोषमणिपुष्पकौ – सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख

अन्वय

कुन्तीपुत्रः राजा युधिष्ठिरः अनन्तविजयम्, नकुलः सहदेवः च सुघोषमणिपुष्पकौ (दध्मुः) ।

व्याख्या

पाण्डवों में ज्येष्ठ युधिष्ठिर के लिए संजय दो विशेषण प्रयुक्त करते हैं — 'राजा' और 'कुन्तीपुत्र'। उन्हें 'राजा' कहना अर्थपूर्ण है, क्योंकि धृतराष्ट्र के सामने ही संजय स्पष्ट कर देते हैं कि धर्मतः राज्य का वास्तविक अधिकारी कौन है। युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ करके चक्रवर्ती पद प्राप्त किया था; द्यूत में छल से उनका राज्य छीना गया था।

'कुन्तीपुत्र' विशेषण माता कुन्ती के तप और धैर्य का स्मरण कराता है। युधिष्ठिर धर्मराज के अंश से उत्पन्न हुए थे और सत्य तथा धर्म के प्रति अपनी निष्ठा के लिए 'धर्मराज' कहलाते हैं। उनके शंख का नाम 'अनन्तविजय' है — अनन्त या अटूट विजय दिलाने वाला। धर्म की विजय कभी समाप्त नहीं होती, यह इस नाम में ध्वनित है।

नकुल और सहदेव माद्री के जुड़वाँ पुत्र थे, जो अश्विनीकुमारों के अंश से उत्पन्न माने जाते हैं। नकुल अपने सौन्दर्य और अश्व-विद्या के लिए तथा सहदेव अपने ज्ञान, ज्योतिष और नीति-विद्या के लिए प्रसिद्ध थे। नकुल का शंख 'सुघोष' (मधुर और गम्भीर घोष वाला) और सहदेव का 'मणिपुष्पक' (मणियों और पुष्पों जैसी आभा वाला) था।

इस प्रकार पाँचों पाण्डवों के शंखनाद का वर्णन पूर्ण होता है। प्रत्येक शंख का नाम उसके स्वामी के स्वभाव से मेल खाता है — धर्म के लिए अनन्त विजय, सौन्दर्य के लिए मधुर घोष, और ज्ञान के लिए मणियों-सी चमक।

प्रसंग

पिछले श्लोक में श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीम के शंखों का वर्णन हुआ; यहाँ शेष तीन पाण्डवों का। अगले दो श्लोकों में पाण्डव-पक्ष के अन्य राजाओं और योद्धाओं के शंखनाद का उल्लेख है।

जीवन-शिक्षा

सच्चा अधिकार छल-बल से नहीं, धर्म से प्रमाणित होता है — इसीलिए वनवासी युधिष्ठिर भी 'राजा' कहलाते हैं। धर्म पर टिकी विजय ही अनन्त होती है।

मुख्य शब्द

अनन्तविजय
युधिष्ठिर का शंख; अनन्त विजय दिलाने वाला
सुघोष
नकुल का शंख; सुन्दर घोष वाला
मणिपुष्पक
सहदेव का शंख; मणि-पुष्प-सी आभा वाला
युधिष्ठिर
ज्येष्ठ पाण्डव, धर्मराज, सत्य के प्रतीक

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